Saturday, August 18, 2018

पत्रकार

राजनीति-पत्रकारिता कैसा ढ़ोंग दिखाती है; कागजो की तफ्तीशो मे बस रंगकार नचलाती है।सच्चाई आलिगंन कर जोर-जोर चिल्लाती है: बस नकली फ़र्ज़ी वेश दिखाकर खुद को श्रेष्ठ बताती है; अब तो कुछ दिखला दो सचा, कल को कुछ कर दो अच्छा ।इनका काम है,गिरना उठना फिर गिरना फिर उठना बनना।तुम तो प्यारे सामाजिक दर्पण सच्चाई को करते अर्पण;अब तो उठना होगा तुझको सच्चा बनना होगा तुझको!  @akash.blog.point

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